धारकंडी में 50 अनुसूचित जाति के किसानों को बांटी कृषि सामग्री, आधुनिक खेती की तकनीकों का दिया प्रशिक्षण

26 अक्तूबर, तरसेम जरयाल : धारकंडी क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए हिमोत्थान सोसाइटी और चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर की ओर से संयुक्त पहल की गई। इसके तहत 17 सितंबर 2026 को दरिणी में एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 50 अनुसूचित जाति के किसानों को कृषि सामग्री वितरित की गई।

शिविर में किसानों को सोयाबीन की वैज्ञानिक खेती, फसलों में बीमारियों की पहचान एवं रोकथाम, ढींगरी मशरूम उत्पादन, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और मक्का की उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी गई।

हिमोत्थान सोसाइटी के प्रोजेक्ट ऑफिसर रणदीप सिंह ने सोसाइटी की ओर से क्षेत्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक पहुंचाने की ‘लैब-टू-लैंड’ अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों, कृषि विस्तार तंत्र, गैर-सरकारी संगठनों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धारकंडी जैसे दुर्गम क्षेत्र में किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण पहल है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने से किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।

प्रशिक्षण शिविर में पादप प्रजनन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वेदना ने सोयाबीन की वैज्ञानिक खेती, उन्नत उत्पादन तकनीकों और फसल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक विधियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. दीपिका सूद ने सोयाबीन की फसल में लगने वाली प्रमुख बीमारियों, उनकी पहचान और रोकथाम के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को ढींगरी मशरूम उत्पादन की तकनीक की जानकारी देते हुए इसे अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के बेहतर विकल्प के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

वहीं, डॉ. अनुपम संदल ने सोयाबीन से विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने, उनके प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने संबंधित विषय पर व्यावहारिक जानकारी देने के साथ मक्का की खेती से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी मार्गदर्शन किया।

इस अवसर पर दरिणी के ग्राम प्रधान गगन ने हिमोत्थान सोसाइटी और कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी रणदीप सिंह के सहयोग से क्षेत्र के किसानों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

शिविर के दौरान 50 अनुसूचित जाति के किसानों को स्प्रे पंप, ढींगरी मशरूम का बीज, जैव नियंत्रण एजेंट, सब्जियों के बीज और फलदार पौधे वितरित किए गए। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाना और उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

इस संयुक्त पहल से धारकंडी क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिलने के साथ मशरूम उत्पादन और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसरों के बारे में भी जानने का मौका मिला। यह प्रयास दुर्गम क्षेत्र में कृषि विस्तार, किसान सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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