20 अगस्त: कांगड़ा के नगरोटा बगवां विकास खंड के समलोटी निवासी प्रणव धर ने सरकारी सहायता का लाभ उठाकर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार का माध्यम बनाया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बैंक में पीओ के पद पर कार्य कर चुके प्रणव ने नौकरी छोड़ अपने गांव के पास मशरूम ग्रोइंग यूनिट स्थापित की।
प्रणव ने उद्यान विभाग के सहयोग से वित्तीय वर्ष 2026-27 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत यह परियोजना शुरू की। करीब 60 से 70 लाख रुपये की लागत वाली परियोजना के लिए विभाग की ओर से 15 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
प्रणव के अनुसार, मशरूम उत्पादन का विचार उन्हें हरियाणा में बड़े स्तर पर मशरूम फार्म संचालित कर रहे परिचितों से मिला। इसके बाद उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और करीब छह महीने पहले फार्म की शुरुआत की। उनकी यूनिट में तीन कमरे हैं, जिनमें प्रत्येक कमरे में करीब 1,600 से 2,000 मशरूम बैग लगाए जा सकते हैं। एक कमरे से लगभग साढ़े तीन टन तक उत्पादन होता है और पूरे वर्ष उत्पादन क्षमता 50 टन से अधिक है।
फार्म में करीब 8 से 10 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। प्रणव के अनुसार, पिछले छह महीनों में फार्म से करीब 40 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है और खर्च निकालने के बाद लगभग 20 प्रतिशत लाभ हासिल हुआ है।
यूनिट में तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पूरे वर्ष मशरूम उत्पादन संभव हो रहा है। प्रणव का कहना है कि सही जानकारी, तकनीक और सरकारी सहयोग के साथ युवा अपने गांव में रहकर कृषि एवं बागवानी को सफल व्यवसाय बना सकते हैं।
उप निदेशक उद्यान विभाग अलक्ष पठानिया ने बताया कि प्रदेश में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों और बागवानों को सहायता दी जा रही है। छोटे स्तर की मशरूम यूनिट स्थापित करने के लिए प्रति इकाई एक लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध है, जबकि बड़े उत्पादन संयंत्रों के लिए भी विभागीय योजनाओं के तहत सहायता प्रदान की जा रही है।
उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिले में अब तक करीब 211 बागवान इन योजनाओं से लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें लगभग 164 छोटे मशरूम यूनिट और 42 उत्पादन इकाइयां स्थापित की गई हैं। जिले में मशरूम उत्पादन के लिए तीन कंपोस्ट यूनिट भी स्थापित की गई हैं।
नियंत्रित वातावरण तकनीक पर आधारित आधुनिक इकाइयों से अब पूरे वर्ष मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। ऑफ सीजन में बेहतर बाजार मूल्य मिलने से किसानों को अतिरिक्त आय के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने प्रणव धर की पहल को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर युवा कृषि और बागवानी के क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकते हैं। उन्होंने जिले के युवाओं से मशरूम उत्पादन जैसी स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया।