23 जुलाई: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ नर्सों की भारी कमी और सरकार की नई भर्ती नीति पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने बाल कृष्ण बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए अपने पूर्व आदेशों में संशोधन से इनकार कर दिया। अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक नया शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा असिस्टेंट स्टाफ नर्स के 312 पदों पर की जा रही भर्ती पर लगी अंतरिम रोक को भी बरकरार रखा है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्सों के 1,535 नियमित पद लंबे समय से खाली हैं। इन पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से भरने के बजाय राज्य सरकार ने 6 नवंबर 2025 को नई भर्ती नीति लागू की, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट स्टाफ नर्स का नया कैडर बनाने का निर्णय लिया गया।
नई नीति के अनुसार चयनित नर्सों की नियुक्ति पांच वर्ष के लिए की जानी थी। हालांकि, इस अवधि के बाद भी उन्हें नियमित किए जाने का कोई अधिकार नहीं होगा और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलेगा। इसी प्रावधान को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।