24 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के बद्दी में राज्य ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संचालित की जा रही एक नकली दवा कंपनी का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर AI की मदद से तैयार किए गए फर्जी ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, जीएमपी-जीएलपी प्रमाणपत्र, उत्पाद अनुमतियां और अन्य सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खुद को वैध दवा निर्माता बताता था।
जानकारी के अनुसार, राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर को मिली सूचना के आधार पर ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर, सुरेश कुमार और अक्षय ठाकुर की विशेष जांच टीम का गठन किया गया। बद्दी पुलिस के सहयोग से की गई कार्रवाई में अजय कुमार नामक व्यक्ति कथित रूप से मैसर्ज डॉ. ट्रस्टमेड के नाम से फर्जी फार्मास्यूटिकल कंपनी संचालित करता पाया गया।
जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से हिमाचल प्रदेश ड्रग कंट्रोल प्रशासन के नाम पर तैयार किए गए फर्जी ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, जीएमपी-जीएलपी प्रमाणपत्र, उत्पाद अनुमतियां, दवा उत्पादों के लेबल और अन्य नियामकीय दस्तावेज बरामद किए गए। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में भी बड़ी संख्या में नकली लाइसेंस और प्रमाणपत्र मिले, जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड जैसा स्वरूप दिया गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी वेबसाइट, ऑनलाइन प्रोफाइल और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी फर्जी कंपनी को विश्वसनीय दिखाकर देशभर के दवा कारोबारियों से ऑर्डर लेता था और उनसे अग्रिम भुगतान भी प्राप्त करता था।
आरोपी को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हरियाणा के साइबर क्राइम थाना कैथल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि दवा नियामक व्यवस्था की विश्वसनीयता से खिलवाड़ करने वालों के प्रति विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति है। फर्जी दस्तावेजों और नकली दवा कंपनियों के जरिए लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।