4 जून: राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2026 में हिमाचल प्रदेश की पंचायतों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम देशभर में रोशन किया है। नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने प्रदेश की दो ग्राम पंचायतों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया।
लाहुल एवं स्पीति जिले की ग्राम पंचायत शांशा ने सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण एवं सामाजिक सुरक्षा युक्त पंचायत श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के लिए पंचायत को एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। पंचायत को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सम्मानित किया गया। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने यह पुरस्कार प्रदान किया। समारोह में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा, पंचायत प्रधान प्रशांत तथा विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
वहीं, मंडी जिले की ग्राम पंचायत लोहारड़ी को स्वच्छ एवं हरित पंचायत श्रेणी में संयुक्त तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंचायत को 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली। पंचायत ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए सभी घरों में शौचालय सुविधा सुनिश्चित की, एलपीजी गैस के उपयोग को बढ़ावा दिया, घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था लागू की तथा कचरा पृथक्करण और कम्पोस्टिंग को प्रोत्साहित किया। पंचायत ने सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक कार्यक्रमों को भी सफलतापूर्वक संचालित किया।
इस बीच, प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास कार्यों की योजना अब पंचायत स्तर पर तैयार करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पहली जून को अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (अधिसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) संशोधन नियम, 2026 का प्रारूप जारी किया गया है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अनुसूचित जनजाति से संबंधित भूमि के हस्तांतरण से पहले संबंधित ग्राम सभा से अनिवार्य परामर्श लेना होगा तथा भूमि हस्तांतरण हिमाचल प्रदेश भूमि अंतरण अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के अनुरूप होना आवश्यक होगा। सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।