नादौन में वैदिक मंत्रोच्चारण और मंगलध्वनि के बीच पूज्य मौनी बाबा पुस्तकालय का भव्य उद्घाटन

14 सितम्बर, नरेश मलोटिया : नादौन फतेहपुर (जलाड़ी) स्थित पूज्य मौनी बाबा कुटिया में ब्रह्मलीन परम पूज्य मौनी बाबा जी की 33वीं पुण्य स्मृति एवं निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के तहत रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ। इसके साथ ही वैदिक मंत्रोच्चारण और मंगलध्वनि के बीच पूज्य मौनी बाबा पुस्तकालय का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे विद्वानों, आचार्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूज्य मौनी बाबा आध्यात्मिक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रतन चंद शर्मा शास्त्री भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस कथा व्यास स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरि जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म, सदाचार, गुरु-परंपरा और भगवान के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा श्रवण का ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य को धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन की दिशा प्रदान करने वाला दिव्य ग्रंथ है। कथा के समापन पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। इसके बाद श्रीमद्भागवत पुराण पूजन, हवन-पूर्णाहुति और आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

पुस्तकालय उद्घाटन के अवसर पर तीन कन्याओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर पूज्य मौनी बाबा जी के समाधि स्थल से पुस्तकालय भवन तक मंगल कलश यात्रा निकाली। पुस्तकालय भवन में छात्राओं द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जा रहा था। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे कर्मकांडी विद्वानों और आचार्यों ने पुरुष सूक्त का वैदिक पाठ किया। शंखध्वनि, घंटाध्वनि, रणभेरी और विभिन्न आध्यात्मिक वाद्य यंत्रों की मंगलध्वनि के बीच कथा व्यास स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरि जी महाराज ने पुस्तकालय का विधिवत उद्घाटन किया। भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरि जी महाराज ने पुस्तकालय की स्थापना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे पुस्तकालय ज्ञान, संस्कार, चिंतन और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य मौनी बाबा जी की स्मृति में स्थापित यह पुस्तकालय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक साहित्य और सनातन परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के अभाव में बहुत से छात्र ज्ञान से वंचित रह जाते हैं। इस पुस्तकालय के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं बाबा जी के पवित्र द्वार में रहकर अपनी पढ़ाई को सुचारू रूप से आगे बढ़ा सकेंगे।

कार्यक्रम में जिला हमीरपुर के अलावा चंबा, सोलन सहित हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से विद्वान, आचार्य और श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान करीब 200 से 300 श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और पुस्तकालय उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

धार्मिक कार्यक्रमों का समापन सोमवार, 14 सितंबर को होगा। प्रातः 6 बजे पूज्य मौनी बाबा जी का पूजन एवं पुण्य स्मृति-पर्व आयोजित किया जाएगा, जबकि दोपहर 12 बजे विशाल अन्नयज्ञ (भंडारे) का आयोजन होगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से सपरिवार पहुंचकर पूज्य मौनी बाबा जी के पूजन एवं पुण्य स्मृति-पर्व में शामिल होने और भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया है।

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