धर्मशाला में सात दिवसीय हेरिटेज एवं पर्यटन गाइड कार्यशाला संपन्न, प्रतिभागियों को मिले प्रमाण पत्र

27 जून , तरसेम जरयाल : इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) धर्मशाला चैप्टर द्वारा पर्यटन विभाग और राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय हेरिटेज एवं पर्यटन गाइड क्षमता निर्माण कार्यशाला का समापन प्रेरणादायी माहौल में हुआ। समापन समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी एवं तिब्बती समुदाय के प्रख्यात व्यक्तित्व दावा त्सेरिंग ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

दावा त्सेरिंग ने कहा कि पर्यटन गाइड केवल पर्यटकों का मार्गदर्शन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का प्रतिनिधि होता है। उन्होंने युवाओं से पर्यटन को रोजगार के साथ-साथ समाज सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनाने का आह्वान किया।

कार्यशाला के अंतिम दिन डॉ. बी.एन. शर्मा ने पारंपरिक पशुपालन, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर व्याख्यान दिया। वहीं, ईको टूरिज्म सोसाइटी के अध्यक्ष संजीव गांधी ने सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने में स्थानीय समुदाय की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में INTACH धर्मशाला चैप्टर के कन्वीनर डॉ. नरेंद्र अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. दीपिका ठाकुर ने परिचय प्रस्तुत किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधार्थी ऋभु की बांसुरी प्रस्तुति ने समापन समारोह को यादगार बना दिया।

डॉ. अमित कटोच ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विरासत संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन, पर्यावरण, ग्रामीण पर्यटन, ईको टूरिज्म और स्थानीय विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। प्रतिभागियों ने भी कार्यशाला को ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार और करियर की नई संभावनाओं की जानकारी मिली।

आयोजकों ने बताया कि प्रशिक्षण के अंतिम चरण में प्रतिभागियों को आशापुरी मंदिर और पालमपुर स्थित शोभा सिंह आर्ट गैलरी का हेरिटेज फील्ड विजिट भी कराया जाएगा, ताकि उन्हें विरासत स्थलों के संरक्षण और पर्यटन मार्गदर्शन का व्यावहारिक अनुभव मिल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश में प्रशिक्षित और जिम्मेदार पर्यटन गाइडों की नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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