जिस बस में वर्षों तक दी सेवा, उसी से निकली सुरेंद्र ठाकुर की अंतिम यात्रा

31 जुलाई: राजगढ़ सब-डिपो में तैनात एचआरटीसी अड्डा प्रभारी एवं परिचालक सुरेंद्र ठाकुर का गुरुवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया। रात्रि ड्यूटी पूरी करने के बाद वह अपने कमरे में आराम करने गए थे, लेकिन सुबह नहीं उठ सके। उनके निधन की खबर मिलते ही राजगढ़ बस अड्डे पर शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार सुरेंद्र ठाकुर पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें परिचालक की नियमित ड्यूटी से हटाकर अड्डा प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। उपचार के लिए अवकाश पर रहने के बाद वह हाल ही में ड्यूटी पर लौटे थे। बुधवार रात उन्होंने नाइट ड्यूटी पूरी की और कमरे में आराम करने चले गए। सुबह जब एक चालक उन्हें अगली ड्यूटी के लिए जगाने पहुंचा तो वह अचेत अवस्था में मिले। उन्हें तुरंत नागरिक अस्पताल राजगढ़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

सुरेंद्र ठाकुर की अंतिम विदाई बेहद भावुक रही। पोस्टमार्टम के बाद निगम कर्मचारियों ने उनकी पार्थिव देह को एचआरटीसी की उसी बस में उनके पैतृक गांव भेजा, जिसमें उन्होंने वर्षों तक सेवाएं दी थीं। कर्मचारियों ने बस को फूलों से सजाकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। जिस बस से उन्होंने हजारों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया, उसी बस से उनकी अंतिम यात्रा निकलते देख अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की आंखें नम हो गईं।

सुरेंद्र ठाकुर विकासखंड राजगढ़ की नेहर पाब पंचायत के जुब्बल गांव के रहने वाले थे। सहकर्मियों के अनुसार वह सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे। यात्रियों के प्रति उनके विनम्र व्यवहार के कारण वह स्टाफ और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे।

परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से शोक संतप्त परिवार को 10 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई है। उनके असामयिक निधन से क्षेत्र और एचआरटीसी कर्मचारियों में शोक की लहर है।

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