24 सितंबर: आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से जाखू रोपवे पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मॉक ड्रिल की अध्यक्षता जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज ने की। इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों और आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों ने भाग लिया।
जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य रोपवे से जुड़ी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों, आपसी समन्वय और प्रतिक्रिया तंत्र को परखना था। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से आपात स्थिति में आने वाली संभावित कमियों की पहचान करने, संचार व्यवस्था की जांच करने और मानक संचालन प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद मिलती है। साथ ही संबंधित विभागों के कर्मचारियों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों से भी परिचित कराया जाता है।
मॉक ड्रिल के दौरान रोपवे के बीच में रुक जाने की स्थिति बनाई गई, जिसमें दो पर्यटकों के ट्रॉली में फंसने की सूचना एनडीआरएफ टीम को दी गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की छह सदस्यीय टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 200 मीटर दूर रोपवे की ट्रॉली में फंसे दोनों पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी की।
डीडीएमए के अनुसार, जाखू रोपवे पर इस तरह की मॉक ड्रिल साल में दो बार आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य रोपवे से जुड़ी आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को लगातार मजबूत करना, विभागों के बीच समन्वय बेहतर करना तथा बचाव और निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना है।
जगसन कंपनी द्वारा संचालित जाखू रोपवे के प्रबंधक मदन शर्मा ने बताया कि रोपवे का सिस्टम बिजली के साथ-साथ जेनसेट से भी संचालित होता है। बिजली जाने की स्थिति में सिस्टम स्वतः जेनसेट पर शिफ्ट हो जाता है।
इस अवसर पर डिप्टी कमांडेंट एवं एनडीआरएफ टीम प्रभारी संजीव कुमार, इंस्पेक्टर संदीप कुमार, डीडीएमए एवं जिला प्रशासन के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।