धर्मशाला से भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी संघर्ष का किया शंखनाद, 2027 से पहले जनता के बीच उठाएगी गारंटियों का हिसाब मांगने का मुद्दा

30 अक्तूबर: भाजपा ने धर्मशाला से ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के माध्यम से कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी राजनीतिक संघर्ष का शंखनाद कर दिया है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि धर्मशाला से उठी यह आवाज अब प्रदेश के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचेगी। भाजपा जनता के बीच जाकर कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों, नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगी।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक आचरण और चुनावी परिणामों का भी आकलन करना चाहिए। जब चुनाव परिणाम अनुकूल आते हैं तो निर्वाचन प्रक्रिया पर चुप्पी साध ली जाती है और प्रतिकूल परिणाम आने पर मतदाता सूची, निर्वाचन आयोग तथा चुनाव प्रणाली पर सवाल खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव परिणामों को स्वीकार करना और मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करना प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित करने जा रही है। कांग्रेस नेताओं की ओर से लोगों से बेखौफ होकर रैली में शामिल होने और एकजुट होकर खड़े होने की अपील की जा रही है। परमार ने कहा कि लोकतंत्र में नारों से अधिक महत्वपूर्ण तथ्य, प्रमाण और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार आचरण है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कोई वास्तविक आपत्ति है तो उसे संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से प्रमाण सहित प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

उन्होंने मतपत्र प्रणाली से हुए हालिया चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए चुनावों के परिणामों पर भी कांग्रेस को विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें नहीं जीत सकी और भाजपा-जद(एस) गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। बिहार के दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन परिणामों से स्पष्ट है कि मतपत्रों से होने वाले चुनावों में भी कांग्रेस को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मतपत्र हो या ईवीएम, प्रत्येक चुनाव में मतदाता का निर्णय ही सर्वोपरि होता है।

विपिन परमार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जनता से दस गारंटियों के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए गए थे। महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये, युवाओं को रोजगार, कर्मचारियों के हितों की रक्षा और किसानों-बागवानों को राहत देने के वादे किए गए थे, लेकिन आज प्रदेश की जनता इनकी स्थिति जानना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता दिल्ली में लोकतंत्र बचाने की बात करने से पहले हिमाचल की जनता को यह बताएं कि चुनाव के दौरान किए गए कितने वादे पूरे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति, बढ़ता कर्ज, विकास कार्यों की रफ्तार, कर्मचारियों की लंबित मांगें, युवाओं के रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की व्यवस्था है। विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है और सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना है।

परमार ने कहा कि धर्मशाला में शुरू हुआ भाजपा का यह संघर्ष किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच संवाद किया जाएगा। कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों, नीतियों, फैसलों और कार्यप्रणाली पर तथ्यात्मक सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की जनता को सरकार के कार्यकाल का पूरा लेखा-जोखा जानने का अधिकार है। भाजपा जनता के सामने सरकार के वादों और जमीनी हकीकत को रखेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करे या देश के किसी अन्य हिस्से में राजनीतिक आयोजन, उसे जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की तरह विपक्ष और आम नागरिक को भी सरकार से हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है। भाजपा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के तहत जनता के मुद्दे उठाती रहेगी और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

इस दौरान कांगड़ा-चंबा लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, पूर्व मंत्री एवं धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, कांगड़ा के विधायक पवन काजल, विधायक ठाकुर रणवीर सिंह निक्का, पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी, पूर्व विधायक अरुण कुमार मेहरा कूका, पूर्व विधायक विशाल नैहरिया, पूर्व विधायक मुल्क राज प्रेमी, पूर्व विधायक रवि धीमान, पूर्व विधायक ठाकुर अर्जुन सिंह, पूर्व विधायक रीता धीमान, भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर, प्रवक्ता संजय शर्मा, विनय शर्मा, संजय गुलेरिया, पंकज जम्वाल, विनोद ठाकुर, संजीव शर्मा, विश्व चक्षु सहित भाजपा के तीनों संगठनात्मक जिलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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