24 सितम्बर: अगर मजबूत इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत हो, तो संसाधनों का अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकता। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्र चुराह के युवा पावरलिफ्टर राजेश ठाकुर ने इसे साबित कर दिखाया है। थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब राजेश का चयन वर्ष 2027 में सिंगापुर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए हुआ है। वह इन प्रतिष्ठित खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राजेश ठाकुर को एशियन गेम्स के लिए उनके विश्वस्तरीय प्रदर्शन के आधार पर चयनित किया गया है। इससे पहले उन्होंने थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 130 प्लस किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अब उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत जस्सोरगढ़ के गांव पट्टी से ताल्लुक रखने वाले राजेश का खेल सफर चुनौतियों से भरा रहा है। आर्थिक तंगी और तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने चंडीगढ़ में अपने खेल को तराशा और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कीं। राजेश अपने करियर में लगातार चार बार नैशनल चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने स्ट्रांग मैन इंडिया का प्रतिष्ठित खिताब भी अपने नाम किया है।
राजेश का चयन इससे पहले श्रीलंका में आयोजित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भी हुआ था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते वह इसमें हिस्सा नहीं ले सके। इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और थाईलैंड में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की।
राजेश ठाकुर अब चंबा और हिमाचल के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए खेलों से जुड़ने का संदेश दिया। उनका कहना है कि खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ अनुशासन सिखाते हैं और उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। राजेश की सफलता बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत के दम पर बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।