7 अगस्त: विकास खंड बल्ह की ग्राम पंचायत गलमा में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 300 किसानों ने भाग लिया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को किसान रजिस्ट्री के महत्व, पंजीकरण प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी देने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के साथ डेयरी व्यवसाय को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और डेयरी को एक साथ अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों और दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
संयुक्त निदेशक, केंद्रीय क्षेत्र (कृषि) डॉ. प्राची ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कम उत्पादक और समस्याग्रस्त क्षेत्रों में हल्दी की खेती करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
गोष्ठी के दौरान किसानों को किसान रजिस्ट्री की आवश्यकता, पंजीकरण प्रक्रिया और इससे मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों पर भी चर्चा की गई।
कृषि, बागवानी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, तकनीकी जानकारी और किसान हितैषी कार्यक्रमों से अवगत करवाया तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का आयोजन आत्मा परियोजना, मंडी के तत्वावधान में विकास खंड बल्ह के बीटीएम और एटीएम स्टाफ द्वारा किया गया। आयोजन को सफल बनाने में ग्राम पंचायत गलमा के प्रधान और पंचायत प्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक आत्मा मंडी डॉ. राकेश पाटियाल, उप परियोजना निदेशक डॉ. हितेंद्र सिंह, डॉ. सोनल, विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि डॉ. विजय कुमार सहित कृषि, बागवानी और पशुपालन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।