10 जुलाई: अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ (भामसं संबद्ध) की जिला चंबा इकाई के बैनर तले गुरुवार को आशा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा हिमाचल प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा। प्रतिनिधिमंडल ने आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि आशा कार्यकर्ता देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी हैं और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद उन्हें न तो न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। महासंघ का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं को आज भी निश्चित मानदेय नहीं मिल रहा, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
महासंघ ने मांग की कि आशा कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों और फैसिलिटेटरों को उनके पद के अनुसार न्यूनतम 18 हजार से 36 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जाए। इसके अलावा आशा योजना में पदोन्नति कैडर बनाया जाए, वार्षिक वेतन वृद्धि लागू की जाए, समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाए तथा सभी आशा कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविलियन किया जाए।
ज्ञापन में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए गए। महासंघ ने ठेका प्रथा और एनजीओ के माध्यम से कार्य करवाने की व्यवस्था समाप्त करने, आशा कार्यकर्ताओं को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) का लाभ देने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था करने तथा कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये और सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान करने की मांग की।
इसके अलावा नियमित टीकाकरण प्रशिक्षण, आयु सीमा में छूट देकर एएनएम पद पर पदोन्नति का अवसर, वर्ष में दो बार नि:शुल्क यूनिफॉर्म और धुलाई भत्ता, अस्पतालों में विश्राम गृह की सुविधा, यात्रा भत्ता सहित 17 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई।