शिमला के सभी बाल देखभाल संस्थानों में विकसित होंगी पोषण वाटिकाएं, बच्चों को मिलेगा खेती का व्यावहारिक ज्ञान

10 जुलाई: शिमला जिले के सभी बाल देखभाल संस्थानों में जल्द ही पोषण वाटिकाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बच्चों को पौष्टिक आहार के साथ-साथ खेती, पर्यावरण संरक्षण और पौधों की देखभाल का व्यावहारिक ज्ञान भी मिल सके। यह निर्णय गुरुवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति तथा मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की समीक्षा बैठक में लिया गया।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के सहयोग से सभी बाल देखभाल संस्थानों में पोषण वाटिकाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, स्वरोजगार, उच्च शिक्षा, विवाह सहायता सहित सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे और युवा तक समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों का अद्यतन रिकॉर्ड नियमित रूप से रखा जाए, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तथा संयुक्त कार्रवाई से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में जिले के विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में 425 बच्चे रह रहे हैं। मिशन वात्सल्य के तहत अप्रैल 2025 से अब तक 14 बच्चों को दत्तक माता-पिता मिल चुके हैं, जबकि 90 बच्चों को पालन-पोषण एवं प्रायोजन योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसी अवधि में 180 नए बच्चों का विभिन्न संस्थानों में प्रवेश हुआ है तथा 80 बच्चों और 56 अभिभावकों को परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

बैठक में जिला बाल संरक्षण समिति की सदस्य उषा राठौर, किरण औक्टा, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल, प्रतिभा राठौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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