23 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज हुई है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के डॉक्टरों ने राज्य का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
कुल्लू निवासी 42 वर्षीय अजय पिछले चार वर्षों से गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने इलाज के लिए चंडीगढ़ और दिल्ली के बड़े अस्पतालों का रुख किया, लेकिन अंत में टांडा मेडिकल कॉलेज पर भरोसा जताया। लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। उनकी पत्नी लवली ने किडनी दान कर मानवीयता की मिसाल पेश की।
इस जटिल सर्जरी को नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनव राणा और ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अमित शर्मा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। टीम में सर्जरी विभाग के डॉ. सोमराज महाजन, डॉ. आशीष शर्मा और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. ननीश सहित कई डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई। ऑपरेशन के बाद पति-पत्नी दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।
रोबोटिक तकनीक की मदद से की गई यह सर्जरी पारंपरिक ऑपरेशन के मुकाबले अधिक सटीक मानी जाती है। इसमें छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे दर्द कम होता है, खून की हानि न्यूनतम रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है। साथ ही मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।
गौरतलब है कि टांडा मेडिकल कॉलेज अब तक 23 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर चुका है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने इस उपलब्धि को संस्थान की बढ़ती विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की दिशा में बड़ा कदम बताया। अब प्रदेश के मरीजों को उन्नत इलाज के लिए बाहर के महंगे अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।