22 सितम्बर: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए क्लास-III पेंशनरों को उनके पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत, जबकि क्लास-I और क्लास-II पेंशनरों को 15 प्रतिशत एरियर इस वर्ष अक्तूबर में प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत है और उनके समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय लाभ जारी करती रही है तथा आने वाले समय में महंगाई भत्ते की एक और किस्त जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों को पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों का एरियर सरकार पहले ही जारी कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि पेंशनरों ने प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हिमाचल की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन योजना बहाल की, ताकि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनरों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी थीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने लंबे समय से मिल रहे इस अधिकार को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि आरडीजी केवल प्रदेश सरकार का अधिकार नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की जनता का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश को हर वर्ष 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में प्राप्त किए थे। उनका कहना था कि यदि पिछली सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा होता तो प्रदेश का कर्ज करीब 30 हजार करोड़ रुपये कम हो सकता था और कर्मचारियों से संबंधित देनदारियां भी चुकाई जा सकती थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने प्रदेश में करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण करवाया, जिनमें से कई वर्तमान में खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए हैं और सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा लिए जा रहे प्रत्येक निर्णय का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है।
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने पेंशनरों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। बैठक में ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पेंशनर उपस्थित रहे।