25 जून: प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में जारी शास्त्री अध्यापकों की मैरिट सूची को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया और अंतिम आंसर की को सही ठहराते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े विवादों में विशेषज्ञ संस्था के निर्णय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
न्यायाधीश रंजन शर्मा ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर संदेह की स्थिति बनती है और दो या अधिक उत्तर सही प्रतीत होते हैं, तो इसका लाभ उम्मीदवार की बजाय परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को मिलना चाहिए, क्योंकि विषय विशेषज्ञता उसी संस्था के पास होती है।
कोर्ट ने कहा कि जब विशेषज्ञों द्वारा आपत्तियों पर विचार करने के बाद अंतिम आंसर की जारी कर दी जाती है, तो ऐसे मामलों में सहानुभूति या दया की कोई भूमिका नहीं रह जाती।
अदालत ने शास्त्री पद (पोस्ट कोड 361) के लिए जारी अंतिम आंसर की और 28 नवंबर 2014 को घोषित अंतिम मैरिट सूची एवं परिणाम को वैध माना है। साथ ही याचिकाकर्ता की दोबारा समीक्षा करने की मांग को भी खारिज कर दिया गया।