धर्मशाला में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित, मतदान केंद्रों पर पहचान प्रक्रिया को आसान बनाने पर मंथन

25 जून : धर्मशाला स्थित डी’पोलो क्लब में “मतदान केंद्र पर पहचान की सुगमता (Ease of Identification at the Ballot)” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित हुई, जिसमें निर्वाचन विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश सुश्री नंदिता गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक पात्र मतदाता की निर्बाध और सुगम भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मतदाता पहचान प्रक्रिया को अधिक सरल, समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यशाला भविष्य की निर्वाचन प्रक्रियाओं के लिए उपयोगी सुझाव और नवाचार सामने लाएगी।

इसके बाद राज्य प्रशिक्षण नोडल अधिकारी द्वारा मतदान केंद्र पर पहचान की सुगमता विषय पर तैयार रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण किया गया।

कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में “मतदाता पहचान से जुड़े कानूनी प्रावधान और कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दों” पर चर्चा हुई। इस दौरान पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान, आईएएस, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक एवं पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी डी.सी. राणा तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध सहयोगी ऋषभ धान्शु ने अपने विचार साझा किए।

दूसरे सत्र में “मतदाता जागरूकता और मतदान दिवस से पहले पहचान प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयास” विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रो. सन्नी अटवाल, डॉ. अंकिता धवन तथा राज्य स्वीप आइकन शालिनी शर्मा और जसप्रीत ने मतदाता जागरूकता अभियान और जनभागीदारी बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।

तीसरे सत्र में महिलाओं, ट्रांसजेंडर, प्रवासी और जनजातीय समुदायों सहित वंचित वर्गों के समावेशन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शोध सहयोगी अरुण शर्मा ने निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के सुझाव दिए।

दोपहर बाद आयोजित सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नई तकनीकों के माध्यम से मतदाता पहचान प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रशासनिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। इस अवसर पर आईआईटी मंडी की प्रो. अपर्णा मालवीय, आईआईटी दिल्ली के प्रो. सुबोध शर्मा, अतिरिक्त निदेशक राजीव शर्मा, नगर आयुक्त धर्मशाला जफर इकबाल, डॉ. संजय बतीश सहित अल्बानिया और बांग्लादेश के निर्वाचन विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

कार्यशाला के अंतिम चरण में समूह चर्चा और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने मतदाता पहचान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, समावेशी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए।

समापन अवसर पर सीएनटी प्रभाग IIIDEM के प्रमुख कपिल शर्मा और अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नीरज चंदला ने अपने विचार व्यक्त किए। अंत में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. मुरारी लाल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक, जागरूकता और समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से मतदाता पहचान प्रक्रिया को और अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

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