11 अगस्त: वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने मंगलवार को लोक भवन शिमला में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हार्ट वाल्व और पेसमेकर दान को देशव्यापी अभियान का रूप देने तथा दान किए गए पेसमेकर के सुरक्षित और नियमन के तहत पुन: उपयोग के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग उठाई। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा।
अविनाश राय खन्ना ने कहा कि देश में नेत्रदान और अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है, लेकिन हार्ट वाल्व और पेसमेकर दान जैसे महत्वपूर्ण विषय अभी भी आम लोगों के बीच पर्याप्त रूप से चर्चित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से जागरूकता बढ़ाई जाए और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए, तो बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि दान किए गए मानव हृदय के वाल्व का उपयोग जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के साथ-साथ गंभीर वाल्व संबंधी बीमारियों से जूझ रहे वयस्क मरीजों के उपचार में किया जा सकता है। ऐसे में जिस तरह देश में नेत्रदान और अंगदान को लेकर अभियान चलाए जाते हैं, उसी तर्ज पर हार्ट वाल्व दान को लेकर भी व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू किया जाना चाहिए।
खन्ना ने पेसमेकर की बढ़ती लागत को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसका खर्च उठाना बेहद कठिन होता है। उन्होंने बताया कि सिंगल-चैंबर पेसमेकर की कीमत लगभग 1.5 से 2.8 लाख रुपये, ड्यूल-चैंबर की 2.5 से 3.5 लाख रुपये, CRT-P की 3.8 से 5.5 लाख रुपये और लीडलेस पेसमेकर की कीमत करीब 8 से 12 लाख रुपये या इससे अधिक हो सकती है। इतनी अधिक लागत के कारण कई जरूरतमंद मरीजों के लिए समय पर उपचार प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष ऐसे कई मरीजों की मृत्यु हो जाती है, जिनके शरीर में लगाए गए पेसमेकर में अभी भी उपयोग योग्य बैटरी लाइफ शेष होती है। ऐसे पेसमेकर को उचित वैज्ञानिक जांच, गुणवत्ता परीक्षण और स्टरलाइजेशन के बाद दोबारा उपयोग में लाने की संभावनाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
अविनाश राय खन्ना ने कहा कि पेसमेकर के पुन: उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और मजबूत नियामक व्यवस्था जरूरी है। इसमें मरीज की सुरक्षा के साथ-साथ सहमति, उपकरण की जांच, स्टरलाइजेशन, ट्रेसबिलिटी और नैतिक मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पहले भी भारतीय अध्ययनों और अस्पतालों के स्तर पर काम हुआ है, लेकिन अब इसे व्यापक और मानकीकृत राष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत है।
ज्ञापन में तीन प्रमुख सुझाव दिए गए हैं। पहला, हार्ट वाल्व और पेसमेकर दान को मौजूदा नेत्रदान एवं अंगदान कार्यक्रमों से जोड़कर देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाए। दूसरा, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ICMR, CDSCO, NOTTO और प्रमुख कार्डियक संस्थानों के परामर्श से दान किए गए पेसमेकर की प्राप्ति, जांच, स्टरलाइजेशन, ट्रेसबिलिटी और विनियमित पुन: उपयोग के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं। तीसरा, हार्ट वाल्व दान और कार्डियोवैस्कुलर टिश्यू बैंकिंग की व्यवस्था को मजबूत कर उसका विस्तार किया जाए।
खन्ना ने राज्यपाल से आग्रह किया कि इस विषय को केंद्र सरकार के संबंधित विभागों के समक्ष उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक पहल की अनुशंसा की जाए। उन्होंने कहा कि नेत्रदान और अंगदान की तरह हार्ट वाल्व और उपयोग योग्य पेसमेकर दान को भी सेवा और जीवनदान के राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और उपयोगी चिकित्सा संसाधनों को व्यर्थ होने से बचाया जा सकेगा। मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति का हार्ट वाल्व या उपयोग योग्य चिकित्सा उपकरण किसी दूसरे जरूरतमंद के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। इसलिए इस मानवीय पहल को सुरक्षित, पारदर्शी और सुव्यवस्थित राष्ट्रीय नीति का रूप देना समय की आवश्यकता है।