7 जून : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण जनहितकारी निर्णय लिए गए। बैठक में सरकारी भूमि पर कुछ कब्जों को नियमित करने के लिए भूमि नियमितीकरण नीति-2026 को मंजूरी प्रदान की गई, जबकि हिमकेयर योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा कवर का दायरा बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक करने का फैसला भी लिया गया।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत भूमि नियमितीकरण नीति का उद्देश्य सरकारी भूमि पर लंबे समय से रह रहे भूमिहीन परिवारों और छोटे किसानों को राहत प्रदान करना है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई इस नीति को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
मंत्रिमंडल ने करुणामूलक नियुक्ति से जुड़े उन मामलों की भी दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया, जिन्हें विभिन्न विभागों द्वारा पहले अस्वीकृत कर दिया गया था। एक विशेष पहल के तहत पात्र मामलों की पुनः जांच कर आवश्यक छूट देने पर विचार किया जाएगा।
किसानों को राहत देते हुए कैबिनेट ने कृषि ऋण ब्याज सब्सिडी योजना शुरू करने को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत राज्य सरकार 3 लाख रुपये तक के पात्र कृषि ऋण पर ब्याज राशि का 50 प्रतिशत वहन करेगी। इससे प्रदेश के लगभग 6,356 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी भूमि ऋण के दबाव के कारण नीलामी के खतरे में है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने मुख्यमंत्री हिमाचल स्वास्थ्य देखभाल (हिमकेयर) योजना के तहत बीमा कवरेज बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब पात्र लाभार्थियों को मौजूदा 5 लाख रुपये की सीमा के बजाय 7 लाख और 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही योजना को बीमा आधारित मॉडल में संचालित किया जाएगा।
इसके अलावा प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य नवाचार नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति 2026 से 2028 तक लागू रहेगी और इसके लिए 2 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। नीति के माध्यम से तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से किसानों, जरूरतमंद परिवारों, युवाओं और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।