हिमाचल के नए मुख्य सचिव पर कल लगेगी मुहर, मुख्यमंत्री के पास पहुंचा पांच वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल

30 मई: हिमाचल प्रदेश में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा मुख्य सचिव संजय गुप्ता शनिवार, 30 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके बाद प्रदेश की नौकरशाही की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू करेंगे। कार्मिक विभाग ने पांच वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। बताया जा रहा है कि इस फाइल पर अंतिम निर्णय रविवार रात 10 बजे के बाद लिया जा सकता है।

मुख्य सचिव पद की दौड़ में सबसे वरिष्ठ अधिकारी 1993 बैच के आईएएस कमलेश कुमार पंत हैं। वर्तमान में वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन, गृह एवं सतर्कता) के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनके पास राजस्व विभाग का अतिरिक्त कार्यभार भी है। पैनल में 1994 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर का नाम भी शामिल है, जो इस समय भारत सरकार में आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

इसी बैच के ओंकार चंद शर्मा भी दावेदारों में शामिल हैं। वे वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (जनजातीय विकास) हैं तथा रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के सीएमडी का अतिरिक्त दायित्व भी निभा रहे हैं। वहीं 1995 बैच के वरिष्ठ अधिकारी भरत हरबंस लाल खेड़ा का नाम भी पैनल में शामिल किया गया है। वह इस समय भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात हैं। हाल ही में उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी रही।

पांचवें दावेदार आर.डी. नजीम हैं, जो वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) के साथ परिवहन और उद्योग विभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। अंतिम समय में उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है।

उधर, 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता शनिवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने 25 अगस्त 1988 को हिमाचल प्रदेश में सरकारी सेवा शुरू की थी। पिछले वर्ष उन्हें मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, जिसे कुछ दिन पहले नियमित नियुक्ति का स्वरूप दे दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक सचिवों के विभागों में भी फेरबदल कर सकते हैं। पिछले कई दिनों से इस संबंध में मंथन चल रहा है और विभिन्न अधिकारियों के कार्य प्रदर्शन का भी आकलन किया गया है। ऐसे में प्रदेश की शीर्ष प्रशासनिक नियुक्ति को लेकर अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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