26 मई:मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए सरकार की नई रणनीति का संकेत दिया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार अब “थ्री F” यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फोरेक्स (विदेशी मुद्रा) के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का भी समर्थन किया, जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने और सोने जैसे गैर-जरूरी आयात कम करने की बात कही गई थी। वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र और खासतौर पर होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। इसका असर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मई महीने में तेल कंपनियां कई बार ईंधन के दामों में बदलाव कर चुकी हैं, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक संकट का असर देश के घरेलू राजस्व पर पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने एमएसएमई सेक्टर की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निर्देश दिए कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लंबित भुगतान 45 दिनों के भीतर किए जाएं। वर्तमान में करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान विभिन्न संस्थानों में लंबित बताया जा रहा है।