14 मई: हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने थानों में लंबे समय से पड़ी लावारिस और जब्त संपत्तियों के निपटान को लेकर नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब थानों में मौजूद हर जब्त सामान और लावारिस वस्तु की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी तथा तय समय सीमा के भीतर उसका निपटान सुनिश्चित करना होगा। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी इस व्यवस्था को पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रदेश के कई पुलिस थानों में वर्षों से जब्त वाहन, पुराने मामलों से जुड़ा सामान और लावारिस वस्तुएं मालखानों में पड़ी रहती थीं, जिससे रिकॉर्ड प्रबंधन और जगह की समस्या लगातार बढ़ रही थी। अब नई SOP लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियों का समयबद्ध निपटारा किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी जब्त या लावारिस वस्तु को पुलिस कब्जे में लेते ही उसकी एंट्री रजिस्टर और सीसीटीएनएस पोर्टल पर करना अनिवार्य होगा। साथ ही वस्तु की फोटो, पहचान संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण भी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी या सामान गायब होने जैसी समस्याओं पर रोक लग सकेगी। यदि कोई वस्तु चोरी, अपराध या संदिग्ध गतिविधि से जुड़ी पाई जाती है तो संबंधित मामले में एफआईआर या डीडीआर दर्ज करना भी जरूरी होगा।
SOP के तहत खराब होने वाली वस्तुओं का निस्तारण 48 घंटे के भीतर एसडीपीओ या एसपी की अनुमति से किया जा सकेगा। वहीं सामान्य लावारिस संपत्तियों के लिए 15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा ताकि वास्तविक दावेदार सामने आ सकें। अधिक मूल्य वाले सामान की जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित की जाएगी। तय समय तक कोई दावा नहीं आने पर एसडीपीओ या एसपी की मंजूरी के बाद संपत्ति के निपटान की प्रक्रिया शुरू होगी।
नई व्यवस्था में थानों में लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों को भी 90 दिनों के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर हटाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी द्वारा नियमों की अनदेखी, लापरवाही या देरी की जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
संपत्तियों के निपटान को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एसपी की अध्यक्षता में विशेष डिस्पोजल कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी नीलामी, नष्ट करने और अन्य प्रक्रियाओं की निगरानी करेगी। नीलामी से प्राप्त राशि को तय प्रक्रिया के तहत सरकारी खजाने में जमा करवाया जाएगा।
नई SOP के तहत हर महीने लावारिस और निपटाई गई संपत्तियों की समीक्षा भी की जाएगी। आईजी स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग होगी और हर महीने की 7 तारीख तक रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजना अनिवार्य रहेगा। वहीं मादक पदार्थ, हथियार, विस्फोटक और नकली मुद्रा जैसी संवेदनशील वस्तुओं के मामलों में एनडीपीएस एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट समेत संबंधित कानूनों के तहत अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी।