फार्मा उद्योग पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की मार, 150 फीसदी तक बढ़े रेट

29 सितंबर, कविता शान्ति गौतम : इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (आईडीएमए) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुमित सिंगला ने केंद्र सरकार से देश के फार्मा उद्योग को मौजूदा संकट से उबारने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और कथित कालाबाजारी के चलते देश के दवा उद्योग पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

सुमित सिंगला ने कहा कि फार्मा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले क्रिटिकल मटेरियल, एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और पैकिंग मटेरियल की कीमतों में 40 से 150 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कच्चे माल की ढुलाई का खर्च बढ़ने से दवा निर्माण की लागत भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में पहले से तय कीमतों पर दवाओं का निर्माण और समय पर आपूर्ति करना फार्मा कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में एपीआई निर्माता कई बार ऑर्डर बुक करने के बावजूद निर्धारित समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। पिछले करीब छह माह से कुछ एपीआई निर्माता और ट्रेडर्स द्वारा निर्धारित दरों पर ऑर्डर लेने के बाद समय पर माल उपलब्ध नहीं करवाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे दवा कंपनियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सरकारी सप्लाई और मल्टीनेशनल कंपनियों को समय पर दवाओं की आपूर्ति न होने पर हर्जाना भी भुगतना पड़ रहा है।

सिंगला ने कहा कि मौजूदा स्थिति का असर दवाओं की घरेलू आपूर्ति के साथ-साथ निर्यात पर भी पड़ सकता है। पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, हृदय रोगों और गैस्ट्रो थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के निर्माण और सप्लाई की चेन भी प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने केंद्र सरकार से फार्मा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक कच्चे माल को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाने की मांग की, ताकि एपीआई निर्माता और ट्रेडर्स किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या मनमानी न कर सकें। उन्होंने कहा कि एपीआई की कीमतों में लगातार बदलाव दवा निर्माण उद्योग पर भारी पड़ रहा है।

सुमित सिंगला ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की आड़ में कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी और कालाबाजारी उचित व्यापारिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि चीन से आने वाले कार्गो जहाजों के आवागमन में कमी के कारण शंघाई से मुंद्रा पोर्ट आने वाले जहाजों के भाड़े में भी करीब 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर दवा निर्माण की लागत और यूनिट की कन्वर्जन कॉस्ट पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि एसीटोन, मेथेनॉल और आइसोप्रोपिल अल्कोहल जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी 40 से 150 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे दवा कंपनियों के सामने निर्धारित समय में दवाओं का निर्माण कर आपूर्ति करने की चुनौती बढ़ गई है और इसका असर देश-विदेश में दवाओं की सप्लाई पर पड़ सकता है।

सिंगला ने कहा कि सभी फार्मा संगठन इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे। आईडीएमए का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपेगा।

उन्होंने कहा कि कोविड काल से ही भारतीय दवा उद्योग कच्चे माल की उपलब्धता और चीन पर निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। केंद्र सरकार ने देश में एपीआई, क्रिटिकल मटेरियल और केमिकल के उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं, लेकिन भारतीय दवा उद्योग अभी भी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है।

सिंगला ने कहा कि भारतीय फार्मा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में ही एपीआई, क्रिटिकल मटेरियल और अन्य आवश्यक कच्चे माल के उत्पादन को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मौजूदा संकट को दूर करने के लिए तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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