1 सितंबर से हिमाचल के स्कूलों में पूरी तरह ऑनलाइन होगी उपस्थिति, दूरदराज क्षेत्रों में अस्थायी शिक्षकों की भर्ती की तैयारी

4 अगस्त: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर 2026 से रजिस्टर पर ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होगी। इसके बाद स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। यह निर्णय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में सोमवार को शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में अभी भी ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है। ऐसे में 1 सितंबर से सभी स्कूलों में पूरी तरह डिजिटल अटेंडेंस लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से स्कूलों के ऑनलाइन निरीक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। अगले एक सप्ताह के भीतर विद्या समीक्षा केंद्र की टीम इस संबंध में रिकॉर्ड तैयार करेगी, जिसके बाद उप निदेशकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बैठक में सरकारी स्कूलों से नीट, जेईई मेन और जेईई एडवांस में चयनित विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार की ओर से सम्मानित करने का निर्णय भी लिया गया। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सभी योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभागीय कार्यों में तेजी लाने तथा लंबित पदोन्नतियों सहित महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र समाधान करने पर भी जोर दिया।

बैठक में प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर अस्थायी शिक्षकों की भर्ती को लेकर भी चर्चा हुई। शिक्षा विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करेगा, जिसे बाद में मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्ताव के तहत समग्र शिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षकों को एक वर्ष के लिए नियुक्ति देने की योजना है। प्रत्येक वर्ष नई मेरिट सूची तैयार की जा सकती है और उपलब्ध अभ्यर्थियों में बेहतर मेरिट वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में इस व्यवस्था के तहत चयन के लिए 100 अंकों का मूल्यांकन मानदंड निर्धारित है। इसमें परास्नातक, एमफिल, पीएचडी और अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। चयनित शिक्षकों को 25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। वहां अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित है। हिमाचल में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार आयु सीमा में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में उपयोगी साबित हो सकती है।

इस वर्ष शिक्षक पुरस्कारों की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब स्कूल स्वयं भी शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा डीसी, एसडीएम, उपनिदेशक और स्कूल प्रबंधन समितियां भी योग्य शिक्षक या स्कूल का नाम प्रस्तावित कर सकेंगी। पुरस्कार के लिए ऐसे शिक्षकों और स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी गतिविधियों और नवाचारों से विद्यार्थियों की शिक्षा तथा जीवन में वास्तविक बदलाव आया हो।

इस बार शिक्षक पुरस्कार में जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। विशेष पुरस्कार के लिए ऐसे शिक्षकों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव किया हो। विशेष पुरस्कार के लिए एसएमसी, आउटसोर्स और वोकेशनल शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। शिक्षकों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष तथा प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक के लिए दो वर्ष का अनुभव निर्धारित किया गया है।

इस बार आवेदकों का निरीक्षण उपनिदेशक स्तर की कमेटी के बजाय शिक्षा निदेशालय स्तर की कमेटी करेगी। साथ ही विद्यार्थियों से संबंधित शिक्षक के बारे में ऑनलाइन फीडबैक भी लिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने महिला शिक्षकों की कम भागीदारी को देखते हुए उनसे अधिक संख्या में आवेदन करने की अपील की है।

बैठक में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान के तहत हिमाचल के 11 स्कूलों के राष्ट्रीय स्तर पर चयन पर भी चर्चा हुई। प्रदेश में कुल 16,997 स्कूल हैं, जिनमें से 15,401 विद्यालयों ने इस अभियान में भाग लिया और 12,814 विद्यालयों ने निर्धारित कार्य पूरा किया। वर्ष 2025-26 के मूल्यांकन के आधार पर हिमाचल के कई सरकारी और निजी स्कूलों ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

रूरल कैटेगरी-1 में बिलासपुर की राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंद ने 99.20 प्रतिशत अंक के साथ राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया। इसी श्रेणी में कुल्लू की राजकीय प्राथमिक पाठशाला चिल्लागे, सिरमौर का राजकीय मिडिल स्कूल धमून, ऊना की राजकीय प्राथमिक पाठशाला गगरेट, कांगड़ा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला बंदोल और कुल्लू का सनोवर वैली इंटरनेशनल स्कूल भी राष्ट्रीय सूची में शामिल हुए।

रूरल कैटेगरी-2 में सिरमौर का पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारग 97.60 प्रतिशत अंक के साथ राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा जवाहर नवोदय विद्यालय हमीरपुर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बुधान ऊना, लॉरेंस स्कूल सनावर सोलन और जवाहर नवोदय विद्यालय बैजनाथ कांगड़ा ने भी राष्ट्रीय सूची में जगह बनाई।

राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हिमाचल के 11 स्कूलों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा और प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को एक्सपोजर टूर पर भी भेजा जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि एक राज्य से 11 स्कूलों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी शैक्षणिक प्रबंधन तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इससे हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

समीक्षा बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली, निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा सहित उपनिदेशक और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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