4 अगस्त: हिमाचल प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं दिसंबर में आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके बाद जनवरी से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने का प्रस्ताव है। यह निर्णय सोमवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शिक्षा निदेशालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया।
बैठक में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा परिणाम, विकास कार्यों, शिक्षकों के रिक्त पदों, विभिन्न योजनाओं और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों से जुड़े विकास कार्यों की अब हर महीने समीक्षा की जाए और कार्यों में देरी के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
बैठक में बताया गया कि श्रीनिवास रामानुजन स्टूडेंट डिजिटल योजना के तहत प्रदेश के 9,359 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें से छह जिलों के 3,089 विद्यार्थियों के बैंक खातों में 16-16 हजार रुपये की डीबीटी राशि भेजी जा चुकी है, जबकि शेष 6,270 विद्यार्थियों के खातों में यह राशि 15 अगस्त से पहले जमा कर दी जाएगी।
जिन सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम 25 प्रतिशत से कम रहा है, वहां संबंधित जिला उपनिदेशक स्वयं निरीक्षण करेंगे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार करेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में खराब परीक्षा परिणाम से जुड़े 123 मामलों में विभागीय कार्रवाई चल रही है। अब जिला उपनिदेशकों को भी ऐसे मामलों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
स्कूलों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि समग्र शिक्षा और पीडीएनए के तहत वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 82.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें से 580 निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 285 कार्य प्रगति पर हैं और 152 कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। शिक्षा मंत्री ने लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वीकृति और बजट उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं करने वाले स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पांच लाख रुपये तक के सिविल कार्य स्कूल प्रबंधन समितियां अपने स्तर पर कर सकेंगी। इससे स्कूलों में छोटे विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विशेष प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। फिलहाल 576 शिक्षकों के पद भरने की प्रक्रिया जारी है। इनमें फिजिकल एजुकेशन, टीजीटी आर्ट्स, टीजीटी मेडिकल और टीजीटी नॉन-मेडिकल के पद शामिल हैं। विभाग को सभी लंबित पदोन्नति मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में डी-नोटिफाइड और विलय किए गए स्कूलों के 738 भवनों को जल्द अन्य विभागों को हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया। साथ ही अतिरिक्त शिक्षकों का युक्तिकरण कर उन्हें एकल शिक्षक वाले और रिक्त पद वाले स्कूलों में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 13 करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड की स्थापना का भी निर्णय लिया गया। इस दौरान शिक्षा विभाग के आधुनिक स्पोर्ट्स वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया। पोर्टल के माध्यम से खेल प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों के डिजिटल डाटाबेस, ऑनलाइन प्रमाणपत्र, लाइव प्रसारण और खेल गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की सुविधा उपलब्ध होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिन प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम है और शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, वहां अतिरिक्त शिक्षकों को एकल शिक्षक वाले या रिक्त पदों वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। इस संबंध में विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।