हिमाचल के चिड़ियाघर में पहली बार पहुंचा रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा, नागपुर से 1900 किमी का सफर तय कर रेणुका जी पहुंचे

21 सितंबर: हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में रविवार का दिन खास रहा। प्रदेश में पहली बार किसी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर का नर-मादा जोड़ा पहुंचा है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतर्राष्ट्रीय प्राणी उद्यान से दोनों टाइगर करीब 1900 किलोमीटर का सफर तय कर श्री रेणुका जी पहुंचे। जोड़े में मादा टाइगर की उम्र तीन वर्ष और नर की उम्र पांच वर्ष है।

टाइगरों के इस जोड़े को विशेष सुरक्षा इंतजामों के साथ नागपुर से श्री रेणुका जी लाया गया। शुक्रवार शाम करीब छह बजे दोनों को गोरेवाड़ा से रवाना किया गया था। वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम पूरे सफर के दौरान टाइगरों के साथ रही।

रॉयल बंगाल टाइगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शैड्यूल-वन श्रेणी में आता है। इसके चलते परिवहन के दौरान नेशनल जू अथॉरिटी के निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। दोनों टाइगरों को विशेष रूप से तैयार खुले ट्रक में लाया गया और यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी गई।

श्री रेणुका जी पहुंचने से पहले ही टाइगरों के लिए आधुनिक एनक्लोजर तैयार कर लिया गया था। करीब 1.67 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एनक्लोजर का क्षेत्रफल लगभग 4500 वर्ग मीटर है। इसमें टाइगरों के लिए खुला क्षेत्र, नाइट शेल्टर, नर्सिंग सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद ने बताया कि टाइगरों के जोड़े को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत नागपुर से श्री रेणुका जी लाया गया है। परिवहन के दौरान नेशनल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों का विशेष रूप से पालन किया गया। अब दोनों टाइगरों को निर्धारित एनक्लोजर में रखा जाएगा।

श्री रेणुका जी की सफारी का इतिहास शेरों की मौजूदगी से भी जुड़ा रहा है। वर्ष 1975 में जूनागढ़ से यहां शेरों का एक जोड़ा लाया गया था। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती गई और एक समय सफारी में करीब 29 शेर और शेरनियां मौजूद थीं। हालांकि, समय के साथ इनब्रीडिंग और आनुवंशिक समस्याओं के कारण इनकी संख्या कम होती गई। वर्ष 2015 में यहां मौजूद आखिरी शेर की भी मौत हो गई।

वहीं, सिरमौर के जंगलों में जंगली टाइगर की मौजूदगी भी पहले कैमरा ट्रैप में दर्ज हो चुकी है। फरवरी 2023 में सिम्बलबाड़ा नेशनल पार्क क्षेत्र में कैमरा ट्रैप के जरिए टाइगर की तस्वीर सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 2026 में पांवटा साहिब के खारा क्षेत्र में भी कैमरा ट्रैप के माध्यम से टाइगर की मौजूदगी दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी।

रेणुका जी में रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े के पहुंचने से यहां की सफारी में वन्यजीव प्रेमियों के लिए नया आकर्षण जुड़ गया है।

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