हिमाचल की विरासत को मिली नई पहचान, रणसिंगा समेत तीन पारंपरिक उत्पादों को GI टैग

16 जून : हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राज्य के तीन पारंपरिक उत्पादों—हिमाचल रणसिंगा, हिमाचल वुड कार्विंग क्राफ्ट और हिमाचल हैंडमेड गलीचा—को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि से इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ-साथ देश-विदेश में नई पहचान भी मिलेगी।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने स्थानीय उत्पादक समूहों, कारीगर संगठनों और अन्य हितधारकों के सहयोग से GI पंजीकरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करवाया। रणसिंगा हिमाचल का पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष महत्व रखता है। वहीं, वुड कार्विंग क्राफ्ट अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और पारंपरिक कलाकारी के लिए प्रसिद्ध है, जबकि हस्तनिर्मित गलीचा प्रदेश की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

डा. विवेक पठानिया ने कहा कि इन उत्पादों को GI टैग मिलना राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने और पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस प्रक्रिया में योगदान देने वाले विशेषज्ञों के प्रयासों की भी सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की नकल और नाम के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही बेहतर ब्रांडिंग, व्यापक बाजार तक पहुंच और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे से स्थानीय कारीगरों की आय एवं रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। यह उपलब्धि हिमाचल की पारंपरिक कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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