16 जून : ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की अवकाशकालीन पीठ ने केंद्र सरकार की स्थानांतरण याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित सभी संबंधित मामलों की सुनवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाकर्ताओं से भी जवाब मांगा है जिन्होंने राजस्थान, कर्नाटक, केरल और दिल्ली उच्च न्यायालयों में संशोधन अधिनियम को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि सभी मामलों को या तो सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर एक साथ सुनवाई के लिए किसी एक उच्च न्यायालय को सौंपा जा सकता है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यदि मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होती है तो इसे तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में आया नालसा फैसला, जो वर्तमान चुनौतियों का प्रमुख आधार है, दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिया गया था।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम, 2026 से जुड़े सभी मामलों पर अंतिम निर्णय आने तक कानूनी प्रक्रिया एक केंद्रीकृत दिशा में आगे बढ़ेगी।