29 मई : सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों और फैसलों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष तौर पर जमानत मामलों में तेजी लाने पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि बेल से जुड़े आदेश आदर्श रूप से अगले ही दिन जारी किए जाएं और तुरंत जेल प्रशासन तक पहुंचाए जाएं, ताकि विचाराधीन कैदियों की रिहाई में देरी न हो।
नए निर्देशों के अनुसार अदालत पहले फैसले का मुख्य हिस्सा खुली अदालत में सुनाएगी, जबकि विस्तृत कानूनी कारण सात दिनों के भीतर कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। साथ ही यह जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी कि फैसला किस तारीख को सुरक्षित रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि तय समयसीमा का पालन नहीं होने पर मामला दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जा सकता है। वहीं, यदि फैसले के कारण समय पर अपलोड नहीं किए गए तो मामले की दोबारा सुनवाई भी करवाई जा सकती है।
शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए हैं कि इन नियमों को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के सामने रखा जाए, ताकि देशभर में इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।