1 अगस्त: शिमला में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति (DLIMC) की बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण के लिए केंद्र प्रायोजित परियोजना के चरण-III के तहत पात्र समितियों के चयन पर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि परियोजना का उद्देश्य पैक्स को पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत कर आधुनिक डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है। इसके तहत हार्डवेयर, ERP सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, रखरखाव और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे पैक्स की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने के साथ किसानों एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
जिला शिमला में कुल 200 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 49 निष्क्रिय हैं। इससे पहले 99 समितियों को कम्प्यूटरीकरण के लिए अनुशंसित किया जा चुका है। इनमें 30 पैक्स चरण-I और 69 पैक्स चरण-II में शामिल हैं। अब तक 96 पैक्स ई-पैक्स के रूप में तैयार हो चुके हैं और उन्हें हैंडओवर प्रमाण-पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
सहायक पंजीयक सहकारी समितियां शिमला एवं जुब्बल की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर समिति ने कुल 23 पात्र पैक्स/एम-पैक्स को चरण-III के तहत कम्प्यूटरीकरण के लिए राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति (SLIMC) को भेजने की सिफारिश करने का निर्णय लिया। इनमें 12 तथा 11 पैक्स/एम-पैक्स के दो प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा नवगठित चार एम-पैक्स के प्रस्तावों पर आगामी चरण में विचार किया जाएगा।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि पैक्स का कम्प्यूटरीकरण सहकारी क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे समितियों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी होगी तथा किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को आधुनिक एवं त्वरित सेवाएं उपलब्ध होंगी।
बैठक में राजेश्वर सिंह, एजीएम हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक, श्याम हेटा, वरिष्ठ प्रबंधक सहकारी बैंक, कंचन लता, सहायक पंजीयक सहकारी समितियां, विवेक, डीडीएम नाबार्ड सहित गौरी शंकर और हरि चंद उपस्थित रहे।