6 जुलाई: जिला चंबा के सलूणी उपमंडल की प्रसिद्ध पारंपरिक सफेद मक्का को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से क्षेत्र के किसानों और स्थानीय उत्पादकों में खुशी का माहौल है। माना जा रहा है कि जीआई टैग मिलने से सलूणी की सफेद मक्का को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
सफेद मक्का संगठन के प्रधान याकूब मागरा और सचिव कृष्ण पंडित ने इसे पूरे चंबा क्षेत्र के किसानों और स्थानीय समुदाय की वर्षों की मेहनत का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैग नहीं, बल्कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित पारंपरिक बीजों और किसानों की अथक मेहनत को मिली आधिकारिक पहचान है। इसके साथ ही उत्पाद की प्रामाणिकता सुरक्षित होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
संगठन के सचिव कृष्ण पंडित ने किसानों से अपील की कि वे इस बार पारंपरिक सफेद मक्का की अधिक से अधिक बिजाई करें और इसके रकबे का विस्तार करें, ताकि जीआई टैग का पूरा लाभ क्षेत्र के किसानों तक पहुंच सके।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के जिन आठ पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें सलूणी की सफेद मक्का भी शामिल है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों की जलवायु में पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली इस मक्का के दाने सफेद, बड़े, मुलायम और स्वादिष्ट होते हैं। स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति में इसका विशेष महत्व है। जीआई टैग मिलने के बाद अब इस उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षित हो गई है।