9 सितंबर: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट कर हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण नदी क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की जल वहन क्षमता प्रभावित होने के साथ मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों और अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा जोखिम कम करने के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग आवश्यक है।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से वन सलाहकार समिति के निर्णयों और सिफारिशों के आधार पर वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया, ताकि संबंधित प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा हो सके। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाने की मांग भी रखी, जिससे इसे पारंपरिक खनन गतिविधियों से अलग रखा जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के बाद नदी चैनल से मलबा हटाने का उद्देश्य नदियों की जल वहन क्षमता बहाल करना, नदी प्रवाह में उत्पन्न अवरोधों को दूर करना तथा मानव जीवन और सार्वजनिक अधोसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने नदी ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि राज्य में ड्रेजिंग कार्य वैज्ञानिक आकलन, रीप्लेनिशमेंट स्टडी और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान के आधार पर ही किए जाएंगे। हटाई जाने वाली सामग्री की मात्रा और ड्रेजिंग क्षेत्र का निर्धारण वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया जाएगा। ये कार्य केवल गैर-मानसून अवधि में सभी पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के बाद नदियों में जमा होने वाली सामग्री की मात्रा कई बार काफी अधिक होती है। इसलिए ड्रेजिंग से निकाली गई सामग्री के सुरक्षित, विनियमित और उचित उपयोग एवं निस्तारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। जहां आवश्यक होगा, ड्रेजिंग को संबंधित वन एवं नदी प्रबंधन योजनाओं का हिस्सा बनाया जाएगा। ड्रेजिंग से प्राप्त सामग्री के विनियमित उपयोग एवं निस्तारण से अर्जित शुद्ध राजस्व का उपयोग सतत विकास और वन संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के साथ हिमाचल प्रदेश की व्यावहारिक आवश्यकताओं और हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, प्रधान सचिव (वन) एम. सुधा और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।