24 सितंबर: पालमपुर में श्री साईं विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि बदलते समय में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को ज्ञान के साथ कौशल, आत्मविश्वास, रोजगार क्षमता और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध करवाना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके ज्ञान, मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार और समाज के प्रति योगदान से होती है। वर्ष 1996 में बधानी से शुरू हुई श्री साईं ग्रुप की शैक्षणिक यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम हैं। ऐसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए विकास और रोजगार के नए अवसर खुलते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ अपने संबंध मजबूत करने चाहिए। युवाओं का लक्ष्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि रोजगार प्रदाता बनना होना चाहिए। भारत में नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है और विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां विद्यार्थी नए विचारों को वास्तविकता में बदल सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला, बहुविषयक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया है। उच्च शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राज्यपाल ने श्री साईं विश्वविद्यालय द्वारा पर्वतीय एवं पर्वतारोहण गतिविधियों से संबंधित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल के पर्वत पर्यटन, साहसिक खेलों, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, खेल विज्ञान और स्थानीय रोजगार के महत्वपूर्ण आधार हैं। विश्वविद्यालय को शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और व्यावहारिक अनुभव को एकीकृत कर ऐसा मॉडल विकसित करना चाहिए, जिससे प्रदेश के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकें।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी हैं और उन्हें उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों का सम्मान करने, निरंतर सीखते रहने, तकनीक के साथ आगे बढ़ने तथा अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
इससे पहले श्री साईं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एस.के. पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। समारोह में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, कुलपति प्रोफेसर वी.पी. पटियाल, प्रबंध निदेशक तृप्ता पुंज, प्रति-कुलपति तुषार पुंज, उपाध्यक्ष रिया पुंज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।