मरीजों की जान से खिलवाड़? टांडा अस्पताल में मिले एक्सपायर्ड स्टेंट और कैथेटर

13 जून : . राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान एवं चिकित्सा महाविद्यालय (टांडा) के कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब में एक्सपायर्ड स्टेंट, कैथेटर और बैलून मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शिकायत मिलने पर शुक्रवार को प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने कैथ लैब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान डिप्टी एमएस डॉ. अरविंद राणा, डॉ. नरेश राणा, संदीप डोगरा, फार्मासिस्ट, अमृत फार्मेसी के प्रबंधक तथा कैथ लैब का स्टाफ भी मौजूद रहा।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कैथ लैब की अलमारियों में जरूरत से कहीं अधिक मात्रा में स्टेंट, बैलून और कैथेटर रखे गए थे। रिकॉर्ड के अनुसार वहां 415 स्टेंट और 316 बैलून व कैथेटर मौजूद थे। जांच में कुछ स्टेंट और कैथेटर ऐसे भी मिले जिनकी एक्सपायरी डेट वर्ष 2025 में ही समाप्त हो चुकी थी।

प्रधानाचार्य ने अमृत फार्मेसी के प्रबंधक से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी ली और पूछा कि आवश्यकता से अधिक चिकित्सा सामग्री कैथ लैब में क्यों रखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर 30 से 50 स्टेंट कैथ लैब की जरूरतों के लिए पर्याप्त माने जाते हैं।

गौरतलब है कि टांडा मेडिकल कॉलेज का कार्डियोलॉजी विभाग पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में रहा है। पहले विभाग से चिकित्सकों के जाने का मामला सामने आया था और अब एक्सपायर्ड स्टेंट व कैथेटर मिलने का मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। इस घटनाक्रम ने मरीजों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। कई मरीजों को आशंका है कि कहीं उन्हें एक्सपायरी डेट पार कर चुके उपकरणों का इस्तेमाल कर उपचार तो नहीं दिया गया।

हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की गहन पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

Social Sharing

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *