16 जून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस पहुंचे, जहां वह 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। 15 से 17 जून तक आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का सम्मेलन स्थल पर औपचारिक स्वागत किया जाएगा।
जी7 देशों के अलावा भारत समेत कई साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सम्मेलन में पहुंच चुके हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर है, जिसे सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह ट्रंप का पहला बड़ा बहुपक्षीय मंच है, जहां वह वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर अन्य नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। वहीं मोदी और ट्रंप के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, वीजा नीति, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।
फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने दोहराया कि भारत एक अधिक टिकाऊ, समृद्ध और समावेशी विश्व व्यवस्था के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
करीब 16 महीनों बाद मोदी और ट्रंप की आमने-सामने होने वाली यह मुलाकात रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा हो सकती है।
जी7 सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का नियमन, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज के रूप में अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।