30 मई: एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सरकार घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों के तहत उन घरों पर विशेष नजर रखी जाएगी, जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ सक्रिय हैं।
आंकड़ों के अनुसार देश में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि पीएनजी नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। कई उपभोक्ताओं ने पीएनजी सुविधा मिलने के बावजूद अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर नहीं किए हैं। ऐसे मामलों की पहचान के लिए तेल विपणन कंपनियां और सिटी गैस वितरण कंपनियां संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उन क्षेत्रों में, जहां पीएनजी नेटवर्क पूरी तरह संचालित है, उपभोक्ताओं को पीएनजी का उपयोग प्राथमिकता से करने के लिए कहा जा सकता है। नियमों का पालन नहीं करने पर एलपीजी कनेक्शन की समीक्षा या उसे निष्क्रिय करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, पीएनजी सुविधा प्राप्त उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। हालांकि, यदि कोई उपभोक्ता भविष्य में ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होता है जहां पीएनजी उपलब्ध नहीं है, तो उसे एलपीजी कनेक्शन दोबारा सक्रिय कराने की सुविधा मिल सकती है।
इसके अलावा, गैस की उपलब्धता और दुरुपयोग पर नियंत्रण के लिए रीफिल बुकिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। सरकार और संबंधित कंपनियां डिजिटल डाटाबेस के माध्यम से गैस कनेक्शनों की निगरानी को और मजबूत बनाने पर काम कर रही हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी व्यवस्था जारी रहेगी। वहीं नए गैस कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को निर्धारित सुरक्षा जमा राशि और अन्य आवश्यक शुल्क का भुगतान करना होगा।
सरकार का उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना, दुरुपयोग रोकना और वास्तविक उपभोक्ताओं तक सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है।