30 मई: नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने सवाल उठाया कि जब विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू किया गया था, तो फिर पेपर लीक जैसी गंभीर घटना कैसे हो गई। कोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष से पूछा कि समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी किस स्तर पर की गई और आखिर यह चूक कैसे हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और निगरानी के बावजूद पेपर लीक हुआ है, तो या तो सिफारिशों में कोई कमी थी या फिर उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया गया।
अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से भी तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) इससे कहीं बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन वहां इस प्रकार की घटनाएं सामने नहीं आतीं। ऐसे में एनटीए को बेहतर व्यवस्थाओं से सीख लेने की आवश्यकता है।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से नीट-यूजी परीक्षा की सुरक्षा और जांच व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एनटीए और विशेषज्ञ समिति ने अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं तथा सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की निगरानी स्वयं नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति है, तो यह और भी चिंताजनक और दुखद है कि इतनी गंभीर घटना सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए केंद्र सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है।