11 सितंबर, नरेश मलोटिया : पूज्य मौनी बाबा कुटिया में पूज्य मौनी बाबा जी के 33वें निर्वाण उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया। इस दौरान पूज्य स्वामी नित्यानंद गिरि जी महाराज ने सत्संग, वैराग्य और आत्मचेतना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा दी।
स्वामी नित्यानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन से राग, मोह और आसक्ति को दूर करने का मार्ग प्रशस्त करता है। सत्संग के प्रभाव से व्यक्ति धीरे-धीरे निसंग और अनासक्त भाव की ओर बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठकर अपने अंतःकरण में स्थित निश्चल चेतना का अनुभव करता है, तो यही अवस्था जीवन-मुक्ति अर्थात जीते जी निर्वाण का स्वरूप बन जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सनातन परंपरा में सत्संग और भगवद्भक्ति के महत्व को जीवन में अपनाने तथा सद्विचार, संयम और आध्यात्मिक साधना को स्थान देने का आह्वान किया।
श्रीमद्भागवत कथा के उपरांत कुटिया की महिलाओं ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया। गीता के श्लोकों के सामूहिक पाठ से कुटिया परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ गीता पाठ में भाग लिया तथा आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
इस अवसर पर डीडीएम साईं कॉलेज के डायरेक्टर राजेश कपिल, विधिचंद, सुदेश, डॉ. रतन चंद शास्त्री सहित कुटिया से जुड़े अनेक साधक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। 33वें निर्वाण उत्सव के तहत आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के चलते पूज्य मौनी बाबा कुटिया इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है।