8 जून , रवी दत्त भारद्वाज: सिरमौर की समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में देवठी मझगांव में चल रहा करियाला एवं सिरमौरी नाटी प्रशिक्षण कार्यक्रम नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहा है। संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली की कला दीक्षा योजना के अंतर्गत संचालित इस कार्यक्रम का मूल्यांकन करने के लिए अकादेमी की विशेषज्ञ टीम क्षेत्र में पहुंची।
मूल्यांकन के दौरान प्रशिक्षु कलाकारों ने पारंपरिक करियाला (स्वांग) और सिरमौरी नाटी की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लोक जीवन, सामाजिक संदेश और हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों ने दर्शकों और विशेषज्ञों का मन मोह लिया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार, लोक संस्कृति शोधकर्ता एवं लोक कलाकार विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन में पिछले एक वर्ष से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में क्षेत्र के युवा कलाकार करियाला और नाटी जैसी पारंपरिक लोक विधाओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
मूल्यांकन के लिए संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली से दीपक जोशी, रविन्द्र किरार और नरवीर सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रशिक्षुओं की प्रस्तुतियों और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
दीपक जोशी, प्रभारी, कला दीक्षा योजना ने कहा कि संगीत नाटक अकादेमी गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से देशभर में लोक एवं पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में लगभग 80 गुरु विभिन्न कला विधाओं में युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। देवठी मझगांव में करियाला और सिरमौरी नाटी के संरक्षण का यह प्रयास सराहनीय है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिकता के दौर में कई पारंपरिक लोक कलाएं विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसे में कला दीक्षा योजना के तहत चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम इन कलाओं को पुनर्जीवित करने और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सरैक परिवार द्वारा अतिथियों का पारंपरिक हिमाचली टोपी पहनाकर स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों ने इस पहल को लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।