16 जून : राजधानी शिमला में हुए चर्चित मनीषा मित्तल हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने महज 40 घंटे के भीतर सुलझा ली है। त्वरित कार्रवाई करते हुए शिमला पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले दोनों शूटरों को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय आशीष निवासी झज्जर और 25 वर्षीय दीपक निवासी रोहतक के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल की गई दो पिस्टल भी बरामद की हैं।
सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एएसपी अभिषेक शर्मा ने बताया कि हत्या के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए मुख्य मार्गों, नाकों और बैरियर वाले रास्तों से दूर रहे तथा छोटे और अंदरूनी मार्गों का इस्तेमाल करते हुए हरियाणा पहुंच गए। बावजूद इसके पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और फील्ड इनपुट्स के आधार पर उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें दबोच लिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हरियाणा से हिमाचल आने के दौरान वाहन पर फर्जी हिमाचली नंबर प्लेट लगाकर आए थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो। पूछताछ में दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि इस सनसनीखेज वारदात के पीछे किसने साजिश रची और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए जांच जारी है।
मृतका मनीषा मित्तल (41) मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली थीं और शिमला में सरस्वती पैराडाइज स्कूल का संचालन कर रही थीं। पुलिस की जांच में स्कूल और संपत्ति से जुड़े विवाद भी प्रमुख बिंदु के रूप में सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि संपत्ति को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
मनीषा अपनी 17 वर्षीय बेटी के साथ स्कूल परिसर में रहती थीं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ बेटी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता देखी गई। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही साजिश से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा किया जाएगा।