6 मई: प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के चलते लागू आचार संहिता का असर अब सरकारी कामकाज पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कर्मचारियों के तबादलों से लेकर विभिन्न विभागों के टेंडर तक कई महत्वपूर्ण फैसले फिलहाल ठप पड़ गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि मई माह के दौरान यह स्थिति बनी रह सकती है, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
राज्य सरकार की ओर से भेजी जा रही तबादला फाइलें राज्य चुनाव आयोग के पास मंजूरी के लिए पहुंच रही हैं, लेकिन आयोग इन्हें इस स्पष्टता के अभाव में लौटा रहा है कि संबंधित कर्मचारी, खासकर शिक्षक और प्रिंसिपल, चुनाव ड्यूटी में तैनात हैं या नहीं। इस कारण शिक्षा विभाग सहित कई अन्य विभागों में तबादलों के लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर, आचार संहिता लागू होने के चलते सरकारी विभागों के टेंडर भी रोक दिए गए हैं। नई योजनाओं के लिए टेंडर जारी नहीं हो पा रहे हैं, जबकि पहले से प्रस्तावित कई कार्य भी अधर में लटक गए हैं। इसका सीधा असर विकास परियोजनाओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। उम्मीद की जा रही है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और आचार संहिता हटने के बाद इन कार्यों में तेजी आएगी।
हालांकि, विशेष परिस्थितियों में चुनाव आयोग की अनुमति से तबादले किए जा सकते हैं। न्यायालय के निर्देशों के आधार पर शिक्षा विभाग ने आयोग से अनुमति लेकर कुछ शिक्षकों के तबादले भी किए हैं।
इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया जारी रखने के लिए अनुमति मांगी है। स्वास्थ्य सुरक्षा निदेशालय ने इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की है। आचार संहिता के कारण फिलहाल यह प्रक्रिया रोकी गई है, जिससे कई क्षेत्रों में निजी अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकरण में देरी हो रही है। यदि एम्पैनलमेंट में और विलंब होता है, तो खासकर उन मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जिन्हें सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध न होने वाली विशेष चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता होती है।