6 मई: हिमाचल प्रदेश में बहुप्रतीक्षित जनगणना अभियान 1 जून से शुरू होने जा रहा है। यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें शिक्षकों सहित विभिन्न विभागों के करीब 19 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इस बार पारंपरिक तरीके के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी जानकारी देने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
पहले चरण में 1 जून से 15 जुलाई तक भवनों और घरों की गणना की जाएगी। इस दौरान प्रत्येक मकान की स्थिति, उपयोग और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरे चरण में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक लोगों की वास्तविक गिनती की जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आयु और सामाजिक स्थिति जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।
जाति आधारित आंकड़ों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है और इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश मिलने के बाद लिया जाएगा। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से जानकारी लेकर की जाएगी। इसके बाद प्रदेशभर में कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करेंगे।
जनगणना के आंकड़े प्रदेश की भविष्य की नीतियों, विकास योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिए महत्वपूर्ण होंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विस्तार में इनकी अहम भूमिका रहेगी। पूरे देश में प्रारंभिक आंकड़े 1 मार्च 2027 तक जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
जनगणना के लिए शिक्षा विभाग से सबसे अधिक ड्यूटियां लगाई जाएंगी। इसके अलावा स्वास्थ्य, लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। जिला स्तर पर कर्मचारियों को 1 से 15 जून तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पहले चरण के लिए 33 महत्वपूर्ण सवाल तय किए गए हैं। इनमें मकान की संरचना, परिवार के सदस्यों की संख्या, सामाजिक वर्ग, भोजन की आदतें, वाहन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
गणनाकार मोबाइल ऐप या टैबलेट के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा दर्ज करेंगे। साथ ही नागरिकों को वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए स्वयं जानकारी भरने का विकल्प भी दिया जाएगा। जिन लोगों के पास इंटरनेट या मोबाइल की सुविधा नहीं है, उनके लिए कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।