21 मई: हिमाचल प्रदेश के 51 शहरी निकायों में हुए चुनाव के बाद अब चुनाव मैदान में उतरे सभी 1147 प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च का पूरा हिसाब राज्य चुनाव आयोग को सौंपना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी उम्मीदवारों पर लागू होगा, चाहे वे चुनाव जीते हों या हार गए हों। प्रत्याशियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रचार में हुए खर्च का पूरा विवरण जमा करना अनिवार्य रहेगा।
चुनाव आयोग की ओर से नगर निगम चुनाव के प्रत्याशियों के लिए अधिकतम एक लाख रुपये, नगर परिषद चुनाव के लिए 75 हजार रुपये और नगर पंचायत चुनाव के लिए 50 हजार रुपये तक खर्च की सीमा तय की गई थी। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रत्याशियों के पास अब खर्च का ब्यौरा जमा करने के लिए सीमित समय बचा है। नगर निगम चुनाव के परिणाम 31 मई को घोषित होंगे, इसलिए वहां के उम्मीदवारों को 30 जून तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी। वहीं अन्य शहरी निकायों के प्रत्याशियों को 16 जून से पहले खर्च का पूरा रिकॉर्ड आयोग को देना होगा।
आयोग ने चेतावनी दी है कि तय समय के भीतर चुनाव खर्च का हिसाब जमा न करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे प्रत्याशियों को पांच वर्षों तक चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इससे पहले भी नगर निगम शिमला चुनाव के बाद नौ उम्मीदवारों को खर्च का विवरण जमा न करने पर पांच साल के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है।
चुनाव के दौरान खर्च की निगरानी के लिए आयोग ने व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे। जांच में कुछ उम्मीदवारों द्वारा समय पर विवरण जमा न करने का मामला सामने आने पर शहरी विकास विभाग ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया था।