2 जुलाई: चीन द्वारा लागू किए गए नए राष्ट्रीय जातीय एकता संवर्धन कानून के विरोध में बुधवार को मैक्लोडगंज में तिब्बती समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। वैश्विक विरोध दिवस के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर चीन सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
इस प्रदर्शन का आयोजन स्टूडैंट्स फॉर फ्री तिब्बत, तिब्बतन यूथ कांग्रेस, तिब्बती महिला संघ और नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ तिब्बत सहित चार प्रमुख तिब्बती संगठनों ने संयुक्त रूप से किया। प्रदर्शनकारी बाजार से सुगलाखांग परिसर स्थित शहीद स्मारक तक रैली निकालते हुए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज और बैनर हाथों में लेकर नए कानून का विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चीन सरकार का यह कानून राष्ट्रीय एकता के नाम पर तिब्बती भाषा, संस्कृति और पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। उनका कहना है कि इसके माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के जबरन समायोजन की नीति को कानूनी आधार दिया जा रहा है।
तिब्बती संगठनों ने चीन सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने, तिब्बती बच्चों को परिवारों से अलग रखने वाली आवासीय विद्यालय व्यवस्था को समाप्त करने तथा संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।