1 अगस्त: चामुंडा के समीप डाढ़ गांव से शुक्रवार को भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय विदा हो गया। भारत के 14वें थल सेना प्रमुख के निधन के साथ ही उस परिवार की एक अहम कड़ी भी टूट गई, जिसने पीढ़ियों तक देश की सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माना।
दिवंगत सैन्य अधिकारी भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के सबसे छोटे भाई थे। मेजर सोमनाथ शर्मा ने 1947-48 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र को हासिल किया था। उनके पिता मेजर जनरल अमर नाथ शर्मा भी भारतीय सेना में डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज के पद पर सेवाएं दे चुके थे।
शर्मा परिवार की राष्ट्रसेवा की परंपरा कई पीढ़ियों तक जारी रही। दिवंगत सैन्य अधिकारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के महानिदेशक जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पद की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने अपनी मातृभूमि और देश की सेवा को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
परिवार के बड़े भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर नाथ शर्मा ने भारतीय सेना में इंजीनियर-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दीं। वहीं उनकी बहन ने भी आर्मी मेडिकल कोर में ब्रिगेडियर के रूप में देश की सेवा की। उनका विवाह मेजर जनरल तिवारी से हुआ था। इस तरह शर्मा परिवार की कई पीढ़ियों ने सेना के माध्यम से राष्ट्रसेवा में अपना योगदान दिया।
डाढ़ गांव की इस सैन्य विरासत के सदस्य के निधन से कांगड़ा सहित पूरे हिमाचल और सैन्य जगत में शोक की लहर है। यह परिवार भारतीय सेना की वीरता, अनुशासन, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक रहा है। परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा।
शर्मा परिवार की पहचान केवल सैन्य उपलब्धियों तक ही सीमित नहीं रही। पारिवारिक जीवन में भी सादगी, शालीनता और गरिमापूर्ण व्यक्तित्व इसकी खास पहचान रहा। पूर्व सेना प्रमुख की पत्नी अपने आकर्षक और सौम्य व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। उनके करीबी लोग उन्हें प्यार से टिच-शर्मा कहकर संबोधित करते थे। उनके पहनावे की भी अपनी अलग पहचान थी और वे खास तौर पर बटरफ्लाई-बैक ब्लाउज पहनने के लिए जानी जाती थीं।
कांगड़ा में एसएसपी के पद पर सेवाएं दे चुके एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अपने संस्मरणों में इस परिवार के साथ बिताए आत्मीय पलों को याद किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को इस प्रतिष्ठित परिवार के साथ कई बार रात्रिभोज में शामिल होने का अवसर मिला।
डाढ़ की धरती से देश को मिले इस गौरवशाली सैन्य परिवार की कहानी आज भी राष्ट्रसेवा, साहस और समर्पण की प्रेरणा देती है। इस महान परिवार के योगदान को देश लंबे समय तक याद रखेगा।