10 सितंबर: मत्स्यिकी विभाग मंडी की ओर से बरोट क्षेत्र की उहल नदी में 40 हजार ब्राउन ट्राउट अंगुलिकाओं का संग्रहण किया गया। इसके साथ ही ट्राउट मछली के संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में उपायुक्त मंडी एवं रिवर मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष अपूर्व देवगन विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ट्राउट का संरक्षण स्थानीय मत्स्य पालकों और एंगलर्स की आजीविका के साथ-साथ क्षेत्र की जलीय जैव-विविधता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से नदी और उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में सहयोग देने की अपील की। 

सहायक निदेशक मत्स्यिकी नीतू सिंह ने ट्राउट संरक्षण से जुड़े नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि 40 सेंटीमीटर से कम लंबाई की ट्राउट मछली का शिकार प्रतिबंधित है। हर वर्ष नवंबर से फरवरी तक चार माह का बंद मौसम रहता है, जिसमें ट्राउट मछली पकड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। ट्राउट मछली पकड़ने के लिए केवल रॉड और लाइन उपकरण की अनुमति है तथा दैनिक मत्स्य आखेट लाइसेंस शुल्क 300 रुपये निर्धारित है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के CWPIL No. 1/2025 के निर्देशों के अनुपालन में उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण और पुनर्स्थापन किया जा रहा है। वर्ष 2024 में शानन पावर प्रोजेक्ट द्वारा बरोट स्थित रिजरवॉयर से उहल नदी में सिल्ट छोड़े जाने के कारण मत्स्य संपदा को हुए नुकसान की भरपाई और नदी में ट्राउट मत्स्य संसाधन को दोबारा स्थापित करना इसका उद्देश्य है। इस कार्य के लिए संबंधित परियोजना की ओर से मत्स्यिकी विभाग को 12 लाख रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं, जिसके माध्यम से आगामी कुछ वर्षों तक उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण और पुनर्स्थापन किया जाएगा।
मत्स्य अधिकारी बरोट विमल गुलेरिया ने लोगों को ट्राउट मछली के इतिहास, जीवन चक्र, पोषक गुणों और स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी। इस अवसर पर एसडीएम पधर सुरजीत सिंह सहित मत्स्यिकी विभाग के कर्मचारी, स्थानीय जनता, ट्राउट मत्स्य पालक, ट्राउट एंगलर्स, महिला मंडल समूहों और अन्य नागरिक मौजूद रहे।