HRTC कर्मियों को उपमुख्यमंत्री की चेतावनी: हड़ताल पर गए तो होगी कार्रवाई, पहले निगम को सौंपनी होंगी बसों की चाबियां

25 जून : हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि निगम यूनियनों का चक्का जाम पूरी तरह गैरकानूनी है और प्रदेश में पहले से ही आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू किया जा चुका है। ऐसे में कोई भी कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हो सकता।

राज्य सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों को पहले निगम प्रबंधन को बसों की चाबियां सौंपनी होंगी। प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि HRTC कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन का कोई भुगतान लंबित नहीं है। सरकार 9000 से अधिक कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दे चुकी है और समय-समय पर विभिन्न भत्तों का भुगतान भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में हुई HRTC हड़ताल के दौरान भी ESMA के तहत कार्रवाई की गई थी।

उन्होंने बताया कि निगम प्रबंधन कर्मचारियों को उनके निर्धारित रूटों के लिए लिखित आदेश जारी कर रहा है और कर्मचारियों को इन आदेशों के अनुसार अपनी सेवाएं देनी होंगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब तक ओवरटाइम अलाउंस (OTA) के रूप में 28 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। पेंशनरों को 240 करोड़ रुपये का एरियर, डेथ-कम-ग्रेच्युटी के रूप में 174 करोड़ रुपये, 350 नए पेंशनरों को 35 करोड़ रुपये तथा 75 वर्ष से अधिक आयु के 700 पेंशनरों को 24 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा 168 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 9099 कर्मचारियों को भी ओटीए का लाभ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन के दौरान HRTC प्रतिदिन करीब ढाई करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहा है। ऐसे में हड़ताल से निगम को भारी आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने कर्मचारियों को निगम की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार उनके हितों के प्रति संवेदनशील है और लगातार सकारात्मक कदम उठा रही है।

उपमुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं से सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों के समाधान के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं और बातचीत के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

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