27 जून : हिमाचल प्रदेश में भविष्य में होने वाली सभी सरकारी भर्तियों के लिए एंटी-चिट्टा टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा। राज्य सरकार प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। इसी कड़ी में अब सभी जिलों के उपायुक्तों की कार्यप्रणाली का आकलन भी नशे के खिलाफ की गई कार्रवाई के आधार पर किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी निवारण दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में शुक्रवार को ‘एंटी-चिट्टा दिवस’ मनाया गया। इस दौरान कार्यकारी मुख्य सचिव केके पंत ने कहा कि सरकार चिट्टे के खात्मे के लिए हर स्तर पर सख्त कदम उठा रही है।
एडीजीपी पुलिस ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया कि दिल्ली में आयोजित एनकॉर्ड बैठक में भी चिट्टे की रोकथाम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि चिट्टा मुख्य रूप से पंजाब के रास्ते हिमाचल पहुंच रहा है। इसे रोकने के लिए हिमाचल पुलिस केंद्रीय और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है। इंटर-स्टेट ड्रग सचिवालय के गठन के बाद कार्रवाई और अधिक प्रभावी हुई है तथा पुलिस नशा तस्करों के सरगनाओं से लेकर उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है।
डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि प्रदेश में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई जारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि चिट्टा या अन्य मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री, भंडारण अथवा सेवन से जुड़ी किसी भी सूचना की जानकारी तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस थाने को दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
उत्तराखंड में निहंग से जुड़े मामले पर डीजीपी ने कहा कि हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर पूरी तरह शांति है। हिमाचल पुलिस उत्तराखंड पुलिस के लगातार संपर्क में है और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।