24 जून : लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कानपुर के दो परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जो शायद कभी नहीं भर पाएगा। हादसे में जान गंवाने वाले संयम विज और सूरजभान सिंह के पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचे, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। जिन घरों में बेटों के लौटने का इंतजार था, वहां सफेद कफन में लिपटे शवों को देखकर परिजनों का दर्द छलक पड़ा। माताओं की चीख-पुकार और परिजनों के आंसुओं ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
संयम विज के परिवार में कुछ दिन पहले ही उनकी दादी का निधन हुआ था। जिस दिन दादी की तेरहवीं थी, उसी दिन संयम का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। बेटे को अंतिम विदाई देते समय मां बार-बार उससे लिपटकर उसे पुकारती रहीं। परिवार में जहां उसके भविष्य और विवाह की चर्चाएं होती थीं, वहां अब सिर्फ मातम पसरा हुआ है।
वहीं, 25 वर्षीय सूरजभान सिंह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। पिता के निधन के बाद वह अपनी मां और छोटे भाई की जिम्मेदारी संभाल रहा था। लखनऊ में नौकरी करने के बावजूद वह हर सप्ताह परिवार से मिलने कानपुर जरूर आता था। लेकिन इस बार उसका घर लौटना अंतिम साबित हुआ। हादसे की खबर मिलने के बाद उसका छोटा भाई तुरंत घर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
संयम और सूरजभान सिर्फ सहकर्मी ही नहीं, बल्कि गहरे दोस्त भी थे। दोनों ने साथ मिलकर अपने भविष्य के सपने संजोए थे और जीवन के हर पड़ाव पर एक-दूसरे का साथ निभाया था। किस्मत का क्रूर खेल देखिए कि दोनों की सांसें भी लगभग एक साथ थम गईं। इस हादसे ने न सिर्फ दो युवाओं की जिंदगी छीन ली, बल्कि उनके परिवारों के कई सपनों को भी हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।